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असम का  प्राकृतिक सौंदर्य




भूमिका 


भारत के पूर्वोत्तर भाग में असम राज्य है ।  इस राज्य का आकार छोटा और आबादी कम होने पर भी इसकी महत्ता अन्य राज्यों से कहीं अधिक तथा महत्त्वपूर्ण है । इसकी प्राकृतिक सौंदर्य तो अपना अलग अलग महत्त्व रखता है ।




प्राकृतिक लीला भूमि 



असम प्रकृति की कन्न्या होने के कारण प्रकृति लीला भूमि है । चारो ओर से पर्वत मलाओ से घिरी हुई प्राकृतिक देवी ने इस कन्या को सुरक्षा प्रदान किया है । इसलिए प्राचीन काल से ही असम फुलवारी की तरह शोभित होता है । बारहों महीने यहां हरियाली नजर आती है । पतझड़ में भी यहां की हरियाली समाप्त नहीं होती । यही असम के प्राकृतिक  सौंदर्य की विशेताओं है । 




सौंदर्य वर्णन 



सौंदर्य निधि असम में बर्चा काल में सौंदर्य का महामेला लग जाता है । बसंत काल में पेड़ पोधो से नए पत्तै निकलते ‌‌‍हेेै ‌और नवजीवन का सौंदर्य लहलहा उठते‌ है । फैले हूए सोतौं में, पर्वत पहाड़ों में, वन‌ उपवन में हर जगह  पेड़ पौधे ही नजर आते है । यह सौंदर्य अनुपम होता है ।


असम के काजीरंगा राष्ट्रीय पार्क, चाय बागान, कामाख्या मंदिर, ब्रह्मपुत्र और बाघों के लिए विख्यात मानस राष्ट्रीय पार्क पयर्टकों को सब से अधिक आकर्षित करते हैं। 



इस प्राकृतिक सौंदर्य के बीच चौधरी चिड़ियौ का नाचना देखकर कवि गाते हैं - 


''गोवा है एबार मोर प्रिय बिहगिनी । ''



लक्ष्मीनाथ बेजबरूवा ने लिखा था -  " एनेखन शुफ्ला एनेखन‌ शुफला ,

एनेखन मरमर देश "।



अर्थात ऐसा सून्दर ऐसा सूफलदायी और ऐसा प्यारा देश । शरत काल‌ में आकाश साफ हो जाता है और चारो और सौरव बिखर जाता है ।



खेतो में धान हवा के मृदुल झोंको से हिलते हैं । यह दृश्य देखकर सभी का हृदय आनंद से नाचते लगता है । प्राकृतिक सौंदर्य के आकर्षण के कारण ही प्राचीन कालो में ऋषि मुनियों ने यहां आश्रम की स्थापना की, जिसकी निशानी आज भी हैं । 



इसके बन में रहने वाले जानवर तथा चिड़ियों की बोलियां बहुत मनमोहक लगती हैं । नाना बनों के पक्षियों का चहकना , कूदना , नाचना देखकर मनुष्यों का मन प्रसन्न होता है ।



सबेरे सूरज के उगने और शाम को सूरज डूबने के समय की स्वर्णिम रेखाएं जब पेड़ पोधों पर पड़ता है तो लगता है असम नंदन कानन ही है।



महाबाहू ब्रह्मपुत्र के दोनों किनारों का सौंदर्य अतुलनीय है । ब्रह्मपुत्र के बीच उमानंदा, उर्वशी ,कर्मनाशा अपने सौंदर्य की झलक सभी को दिखा रहा है । 



ब्रह्मपुत्र के प्राकृतिक सौंदर्य के बारे में महात्मा गांधी ने लिखा था -" असम के प्राकृतिक दृश्यों की तरह और कहीं मैंने देखा है, ऐसा याद नहीं । 




मंतव्य 


असम के बारे में पूर्व में बाहरी लोगों की धारणा थी की असम जादू का देश है । यहां आने वाले लौटकर जा नहीं पाते । उन्हें जादू के बल से बांध लिया जाता था । लेकिन वास्तव में यह जादू या मंत्र नहीं है । 


यहां का मनोरम सौंदर्य ही एकमात्र जादू का काम करता है । जो आता है वह असम की प्राकृतिक सौंदर्य में फस कर रह जाता है और कुछ दिनों के भीतर वह मालामाल होकर अपने देश में जाना नहीं चाहते हैं ।



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