छात्रों का कर्त्तव्य, स्वतंत्र भारत में विद्यार्थियों का कर्तव्य, विद्यार्थी का कर्तव्य in Hindi, राष्ट्र के प्रति विद्यार्थियों का कर्तव्य, विद्यार्थी जीवन कर्तव्य और अधिकार पर निबंध,Vidyarthi jivan kartavya v adhikar short speech, विद्यार्थी जीवन , essay on student life in 200 words in hindi, student life essay in hindi, important of discipline in student life in hindi, indiscipline among students in hindi,speech on students life in hindi





छात्रों का कर्त्तव्य




तात्पर्य 



छात्र कहने से शिष्य अथवा विद्यार्थी का बोध होता है । इस दृष्टि से देखा जाय तो प्राथमिक कक्षा से लेकर विश्वविद्याल तक पढ़ने वाले सभी छात्र हैं । पर यायू भेद से उनके कर्त्यव भिन्न भिन्न होते हैं । क‌र्तव्य का यह अर्थ है कि क्या करना चाहिए । अतः हम कह सकते है क्या करने योग्य का करणीय कार्य ही कर्त्यव हैं । 




प्राचीन काल में विद्यार्थी जीवन 



समय के साथ साथ अध्ययन के नियमों में भी परिवर्तन होता रहता है । प्राचीनकाल में छात्रों का अध्ययन ऋषि मुनियों के आश्रम में गुरु की शरण में हुआ करता था । छात्र सामाजिक जीवन से दूर रहकर गुरु की शरण में गुरु गृह में पढ़ता था । उनका प्रधान उद्देश्य विभिन्न शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त करना था । 




पच्चीस वर्ष शिक्षा ग्रहण करने के बाद गृहस्थाश्रम में प्रवेश करते थे । 'छात्रानां अध्ययन: तप: । अर्थात अध्ययन अथवा शिक्षा ग्रहण ही  छात्रों का तप हैं । प्राचीनकाल में अध्ययन का क्षेत्र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक , सांस्कृतिक आदि बहुत से विषय में बढ़ गया है ।




छात्रों का कर्तव्य



जब तक छात्र या छात्राएं विद्यालय में हैं ,तब तक अध्ययन करना ही उनका मुख्य कर्तव्य है ।  संसार में अपने को प्रतिष्ठित करने के लिए छोटी अवस्था में शिक्षा प्राप्त करना बहुत ही जरूरी है । 



विद्यार्थियों की प्रतिभा विकसित करना शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य है । बिना श्रद्धा के भक्ति सिद्ध नहीं होती । इसलिए शिक्षार्थियों को चाहिए कि अपने गुरुजनों के प्रति श्रद्धा और अध्यापकों के प्रति भक्तिभाव रखे । इसके अलावा उन्हें सभी विषयों के बारे में जानने की इच्छा रखनी चाहिए । 



विद्यालय में अध्ययन करने के अलावा छात्र के कुछ अन्य कर्तव्य  भी हैं । उन्हें अपने शरीर के प्रति ध्यान देना चाहिए । स्वास्थ ही परम धन है । 





अगर शरीर स्वस्थ और बलवान नहीं होगा तो कोई बड़ा और अच्छी काम नहीं किया जा सकता । अतः प्रतिदिन नियमित रूप से खुली हवा में व्यायाम ,खेलकूद , शारीरिक परिश्रम आदि से शरीर को मजबूत बनाना चाहिए ।




सामाजिक कर्तव्य



आज का छात्र कल का नागरिक है । वह सामाजिक सदस्य है । अतः समाज के बाहर उसकी शिक्षा नहीं हो सकती । जब से उसकी आंखे खुलती हैं, तब से वह अपने को समाज में पाता है । उस समाज के प्रति भी उसका कर्तव्य है । समाज में उनके माता ,पिता , भाई, बहन और मित्र आदि रहते हैं । 



समाज में कई जातियों या संप्रदायों के लोग रहते हैं । कोई अमीर है, तो  कोई गरीब और कोई विद्वान है तो कोई निरक्षर । अन सबके साथ समानता का व्यवहार करना चाहिए । 



छात्रों को ऐसा काम करना चाहिए जिससे उनमें एकता और भातृत्व के प्रेम का विकास हो । देश के प्रति सम्मान की भावना दिनोदिन बढ़ती रहे ।




आर्थिक और राजनीतिक



आर्थिक क्षेत्र में भी छात्र का कर्तव्य महान हैं । धन के बिना विद्यार्थी पढं भी नहीं सकता । भविष्य में उन्हें अपने परिवार के लोगों का पालन - पोषन करना पड़ता है । इसलिए छात्रों को मितव्यय होना आदि भी सीखने की आवश्यकता है ।



समय के साथ शिक्षा का मान तथा स्तर भी बदल गया है । छात्र को राजनीति का ज्ञान आवश्यक है । योग्य नागरिक बनने के लिए राजनीतिक मतो या आदर्शो तथा समस्याओं का समझना आवश्यक है । 




उपसंहार



साधारणतः छात्र का हृदय पवित्र , कोमल तथा उदार होता है । अतः धर्य, क्षमा, दया आदि गुणों का विकास करना छात्रों लक्ष्य होना चाहिए । तात्पर्य यह है कि आज के छात्रों को जीवन के सभी उपयोगी वस्तुऔं का ज्ञान अर्जित करना चाहिए । 



देश की उन्नति छात्रों पर ही निर्भर है । अतः विद्यार्थी को तन, मन और मस्तिष्क तीनों का विकास कर उत्तम नागरिक बनना चाहिए ।



Have A Great opportunity ahead !

Ask anything question that you have the query. 
Surely your answers will be answered.



Thanks.     
                                                          
                                                                                   Home

 

No comments

Leave A Reply
Welcome you for your valuable feedbacks & comments..

Comment

Theme images by mariusFM77. Powered by Blogger.