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Essay on Bihu in Hindi




बिहू त्योहार



परिचय 


बिहू असम का जातीय पर्व है।  वर्ष में तीन बार बिहू का पर्व मनाया जाता है । बहाग अथवा रंगाली बिहू बैशाख में मनाया जाता हैं ।


बिहु शब्द का मतलब:- 'बि' का  मतलब 'पुछ्ना' और 'हु'  का मतलब 'देना' और वही से बिहु नाम उत्पन्न हुआ। - " कलागुरु " विष्णु प्रसाद राभा "


काति बिहू या कंगाली बिहू कार्तिक मास में मनाया जाता हैं। माघ बिहू या भोगाली बिहू माघ मास में मंकर संक्रांति के दिन मनाया जाता है ।



रंगाली बिहू 



बैसाख महीने से शुरू होता है, जो अंग्रेजी माह के अप्रैल महीने के मध्य में शुरू होता है और यह बिहू 7 दिन तक अलग-अलग रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है।


इस बिहू का दूसरा महत्व है कि उसी समय धरती पर बारिश की पहली बूंदें पड़ती हैं और पृथ्वी नए रूप से सजती है। 



कैसे मनाते हैं त्योहार ?


रंगाली बिहू के प्रथम दिन को गुरु बिहू कहते है । उस दिन गाय के सिंगो में हल्दी लगाकर स्नान  कराया जाता है । गाय को लाऊ , बैगन इत्यादि खिलाता है । 



शाम के समय जहां गायें रखी जाती हैं, वहां गाय को नई रस्सी से बांधा जाता है और नाना तरह के औषधि वाले पेड़-पौधे जलाकर मच्छर-मक्खी भगाए जाते हैं। 


दूसरे दिन को मानुह बिहू कहते है । उस दिन अथिति सत्कार करते है । उस दिन प्रात: स्नान करने के बाद घर के बड़े लोगों को प्रणाम कर आशीर्वाद लेते हैं । उसी दिन वस्त (गामोछा) ग्रहण करते हैं तथा भेट  करते हैं । लोग खुशी के साथ नए साल को बधाई देने के लिए रिश्तेदारों और दोस्तों के घर जाते हैं। 


बसंत काल में यह बिहू उत्सव सबको नाच गाना से आनंदित करता हैं । असम के हर अंचल में बिहू गान और बिहू नृत्य होते हैं।  


बिहू नाच के लिए जो ढोल व्यवहार किया जाता है उसका भी एक महत्व है। कहा जाता है कि ढोल की आवाज से आकाश में बादल आ जाते हैं और बारिश शुरू हो जाती है जिसके कारण खेती अच्छी होती है।


बिहू के समय में गांव में विभिन्न तरह के खेल-तमाशों का आयोजन किया जाता है।



काति बिहू 



आश्विन और कार्तिक में काति बिहू मनाया जाता है । उस बिहू में आनंद उत्सव नहीं होता, क्योंकि पुराना धान शेष हो जाता है तथा नया धान काटने का समय भी नहीं होता । 



कैसे मनाते हैं त्योहार ?


आदमी तंगी की हालत में रहता है । अत: उसे कंगाली बिहू कहते हैं । उस दिन नया तुलसी का पोधा लगाकर उसके नीचे दीप जलाकर तथा नैवेद्द चढ़ाकर नाम कीर्तन करते हैं । 



उसी दिन आकाशदीप जालाते हैं। धान की फसल को तथा घर में धान भंडार का दीप तथा नैवेद्द से पूजा करते हैं ।




माघ  बिहू


पौष माह की संक्रांति के दिन माघ बिहू मनाया जाता है । उस समय नया धान घर में आ जाता है । तरह तरह के खाने के व्यंजन बनाए जाते हैं । 


माघ बिहू को बहुत ही हर्षोल्लास के साथ जनवरी के महीने में मनाया जाता है। माघ बिहू पूरी तरह से फसल से सबंधित त्यौहार है | 



कैसे मनाते हैं त्योहार ?


बिहू के पहले दिन तड़के खेत में भेलाघर बनाकर उसमें रात के समय सभी एक साथ मिलकर खाना खाते हैं । गांव के सभी लोग यहां रात्रिभोज करते हैं |


उरुका के दूसरे दिन सुबह स्नान करके मेजी जलाकर माघ बिहू का शुभारंभ किया जाता है। गांव के सभी लोग इस मेजी के चारों ओर एकत्र होकर भगवान से मंगल की कामना करते हैं। 


इस अवसर पर सामुदायिक भोज एक सप्ताह तक चलते हैं। साथ ही मनोरंजन के लिए अन्य कार्यक्रम जैसे पशु युद्ध इत्यादि भी आयोजित किए जाते हैं।



बिहू के पकवान :


सभी घरों में दही चिउड़ा , तिल , पिठा आदि खाते और खिलाते हैं । असम की सभी जनजातियां बिहू मनाती हैं तथा आनंद उत्सव में भाग लेती हैं ।




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