Biography of Gopinath Bordoloi in Hindi | लोकप्रिय गोपीनाथ बरदलै की जीवनी | The first Chief Minister of independent Assam | EduAssams.com . Gopinath Bordoloi life,gopinath bordoloi essay in hindi language, Gopinath Bordoloi Life, gopinath bordoloi essay in hindi language




लोकप्रिय गोपीनाथ बरदलै की जीवनी




लोकप्रिय गोपीनाथ बरदलै :




जन्म :


स्वतंत्र असम के पहले मुख्यमंत्री गोपीनाथ बरदलै का जन्म गूवाहाटी में सन 1891 ई. में हुआ था । 



उसका परिवार :


उनके पिता स्वर्गीय बुद्धेश्वर बोरदोलोई एक प्रसिद्ध चिकित्सक थे। उन्होंने बचपन में ही अपनी माँ को खो दिया था। वह अपनी प्यारी विधवा बहन के अधीन बड़ा हुआ।



शिक्षा :



बचपन से ही ये अहंकार , दिखावे एवं कुसंस्कारों से दूर रहे । अपने विद्यार्थी जीवन काल में वे प्रतिभाशाली छात्रा थे । उन्होंने गुवाहाटी में कॉटन कॉलेजिएट स्कूल में दाखिला लिया।



वर्ष 1907 में उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा दी। 1909 में उन्होंने कॉटन कॉलेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की। फिर उन्होंने कलकत्ता में स्कॉटिश चर्च कॉलेज में प्रवेश लिया और 1911 में इतिहास में सम्मान के साथ स्नातक की उपाधि प्राप्त की।



उस क्षण में उनके पिता बुद्धेश्वर बोरदोलोई निधन हो गए और उन्होंने सोनाराम एच.ई. स्कूल। उन्होंने 1914 में एम.ए. पास किया और बी.एल. 1915 में डिग्री।



1919 में उन्होंने श्रीमति सुरबाला देवी से शादी की।



देश सेवा :



कुशल वकील होते हुए भी अपनी पूरी शक्ति वकालत में नहीं लगा सके । उसी समय पूरे भारतवर्ष के लोग महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वतंत्रता ‍आन्दोलन के लिये तैयार हो हो रहे थे । 



ब्रिटिश साम्राज्य के साथ असहयोग का नारा बुलंदी पर था । इनका भी देश - प्रेम जाग उठा और अपनी पूरी शक्ति के साथ महात्मा गांधी के आंदोलन में कूद पड़े । 



वे भी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में सदस्य हुए और अपना पूरा जीवन भारत स्वराज के लिए लगाया । 



वर्ष 1921 में वे महात्मा गांधी के मार्गदर्शन में असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए। वे कलकत्ता कांग्रेस और नागपुर कांग्रेस में शामिल हो गए। उसे गिरफ्तार कर जेल में रखा गया था।



वह फिर से अहमदाबाद कांग्रेस में शामिल हो गए और ब्रिटिश सरकार द्वारा उन्हें जेल में रखा गया।



वह 1934 में गुवाहाटी नगरपालिका के अध्यक्ष बने। 1937 में वह असम विधानसभा के लिए चुने गए और नेता बने। जब 1938 में सादुल्ला मंत्रालय गिर गया - कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष सुभाष चंद्र बोस ने असम में कांग्रेस गठबंधन मंत्रालय के गठन की व्यवस्था की।



सन 1938 ई. में इन्होंने स्वतंत्र एवं मुस्लिम लीग के सहयोग से मंत्रिमंडल बनाया । द्वितीय विश्वयुद्ध के समय ब्रिटिश साम्राज्य के अधीनस्थ रहने के कारण इन्होंने सन 1935 में त्यागपत्र दिया । 


इस बीच मौकापरस्त मोहम्मद सादुल्लाह ने अंग्रेजों के सहयोग से एक बार फिर सरकार बना ली और सांप्रदायिक गतिविधियों को तेज़ कर दिया। 


सन 1944 में रिहा होने के बाद गोपीनाथ ने और नेताओं के साथ मिलकर सरकार की गतिविधियों का विरोध किया जिसके फलस्वरूप सादुल्ला ने उनकी बातों पर अमल करने के लिए समझौता किया।



इसके बाद इन्होंने गांधीजी के सत्याग्रह आंदोलन का समर्थन किया और जेल गए । बोरदोलोई असम का प्रमुख बन गया। 13 महीने बाद वह फिर से असम विधानसभा के लिए चुने गए।



वह असम को मुस्लिम लीज के चंगुल से बचाने के लिए लड़े। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद वे असम के प्रथम मुख्यमंत्री बने । 



उनके प्रयत्नों के कारण ही असम चीन और पूर्व पाकिस्तान से बच के भारत का हिस्सा बन पाया। उस समय के तमाम नेताओं की तरह, गोपीनाथ बोरदोलोई भी गांधीजी के ‘अहिंसा’ की नीति के पुजारी थे। उन्होंने जीवनपर्यान्त असम और वहां के लोगों के लिए कार्य किया।



राजनीतिक जीवन :



स्वतंत्र असम के पहले मुख्यमंत्री गोपीनाथ बोरदोलोई थे, जिन्होंने गौहाटी विश्वविद्यालय (1948), गौहाटी उच्च न्यायालय (1948) और ऑल इंडिया रेडियो (AIR) के गुवाहाटी स्टेशन की नींव रखी।



1950 में जब गोपीनाथ बोरदोलोई का निधन हुआ, तब बिष्णु राम मेधी ने असम के अगले मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाला।



1950 से 1957 के उनके कार्यकाल के दौरान, पहली पंचवर्षीय योजना शुरू की गई थी, शासन की पंचायत प्रणाली शुरू की गई थी और कृषि क्षेत्र को अधिक महत्व मिला था।



मृत्यु :



इन्होंने देश एवं राज्य के बहुमुखी विकाश के लिए सतत कठिन प्रयास किया । असम तथा असम वासी उनका सदा ऋणी रहेगा । 



उनकी ईमानदारी और प्रगतिशील दृष्टिकोण ने उन्हें एक लोकप्रिय बयान दिया। वह एक और सभी से प्यार करता था और वह सभी के लिए न्याय के लिए हमेशा खड़ा था।



5 अगस्त 1950 को अचानक इस लोकप्रिय राजनेता का निधन हो गया। उनकी असामान्य लोकप्रियता को याद करते हुए असम के लोगों ने उन्हें "लोकप्रिया" की उपाधि दी।




Have A Great opportunity ahead !

Ask anything question that you have the query. 
Surely your answers will be answered.



Thanks.     
                                                          
                                                                                   Home

 


No comments

Leave A Reply
Welcome you for your valuable feedbacks & comments..

Comment

Theme images by mariusFM77. Powered by Blogger.